शनिवार, 11 जनवरी 2014

एक संवेदनशील कवि और लेखक .....


"नारी जागरण का अर्थ यह बिलकुल नहीं कि हम अपने बड़ों की इज्जत करना भूल जाय, या बड़ों की निंदा करने और उन्हें खरी-खोटी सुनाने में गर्व महसूस करे ! यदि आप अपनी सास का सम्मान अपनी माँ की तरह करके, बच्चों में संस्कार की नीव डालने का कार्य शुरू करे, सास और ससुर के निर्देश अपने माता-पिता के आदेश की तरह स्वीकार करे, तो हर घर एक चहकता-महकता स्वर्ग बन सकता है " !
इन पंक्तियों को पढ़कर आप सबको निश्चित एक संवेदनशील कवि और लेखक हमारे ब्लॉग जगत के वरिष्ठ ब्लॉगर मित्र "सतीश सक्सेना" जी की  हाल ही में छपी उनकी पुस्तक "मेरे गीत" की याद आयी होंगी है ना ?  पेशे से इंजिनियर पर ह्रदय से बहुत ही भावुक प्रकृति के सतीश सक्सेना जी ब्लॉग जगत में किसी परिचय के मोहताज नहीं है !
अक्सर पारिवारिक मूल्यों की बात अपने गीतों में कहने वाले इस भावूक कवि ने अपनी पुत्री के जरिये उन लाखो करोडो पुत्रियों को "पिता का ख़त पुत्री को" से प्यारी सी वसीयत के रूप में अपने गीतों में कलमबद्ध किया है ! सच में उनकी बिटिया के जरिये हम सबको एक अनमोल तोहफा दिया है उन्होंने ! एक ख़ुशी की खबर आप सबसे शेअर करना चाहती हूँ जो की मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है यह पढ़कर :) !
हैदराबाद से निकलने वाली पत्रिका "डेली हिन्दी मिलाप " के रविवारीय परिशिष्ट "मिलाप मजा" में लगातार सतीश जी के बारे में, उनके गीतों को छाप रहा है यह हम सबके लिए बहुत गर्व की बात है ! सतीश जी, यह आपके "मेरे गीत" घर-घर पहुंचे और नए संस्कारों में पली बढ़ी आज की हमारी आधुनिक पीढ़ी पारिवारिक इन मूल्यों को आपके उन गीतों के जरिये जाने पहचाने यही मेरी कामना है ! इस पत्रिका में छपे आपके प्रकाशन पर बहुत बहुत बधाई हो आपको :)!

11 टिप्‍पणियां:

  1. वाह !
    सतीश जी को बहुत बहुत बधाई एवम शुभकामनाऐं !

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  2. सतीश जी सचमुच बहुत ही संवेदनशील कवि ,लेखक और एक आदर्श पिता हैं । पुस्तक प्रकाशन के लिये बहुत-बहुत बधाई ।

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  3. सतीश जी को बहुत बहुत बधाई एवम शुभकामनाऐं !

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  4. सतीश जी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएँ ...

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  5. सतीश जी संवेदनशील इन्सान हैं ... इनकी जितनी तारीफ़ की जाए कम है ...

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  6. सतीश जी को बहुत बहुत बधाई एवम शुभकामनाऐं !

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  7. आप सबका आभार खास तौर पर सुमन जी का जिनके कारण यह प्रकाशन पता चला ! यह मेरा नहीं कविता का सम्मान है !
    आदर सहित !

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