सोमवार, 14 नवंबर 2016

मौन संगीत ...


ध्यान देकर सुनों तो
सन्नाटे की भी
अपनी जुबान होती है
जो बरसाती मेंढकों की
टर्र-टर्र में गुम हो
जाती है !

ध्यान देकर सुनों तो
शब्द,विचार,भावों से परे
मौन का भी अपना
मुखर संगीत होता है
जो अंतर्लीन
 होता है !

बुधवार, 2 नवंबर 2016

बह गया कवि ...

तम की विकट
निशा बीती !
सुहानी भोर में
सूरज की सुनहरी
धुप निकली !
अहम पिघला
गर्माहट से,
भावों की बाढ़
आ गई !
बाढ़ में,
बह गया कवि !
हाथ में धरी
चाय की प्याली
रह गई
धरी की धरी ... !

गुरुवार, 8 सितंबर 2016

अपना-अपना आकाश ...

धारणा,
कांच की पारदर्शी
दीवार
जैसी होती है !
जब तक उससे
खुद टकरा नहीं जाते
तब तक
पता ही नहीं चलता
कि दीवार है !
सबकी अपनी-अपनी
कांच की दीवारे है
जिसमे सिमित
प्रतिबिंम्बित
सबका अपना-अपना
आकाश है .. !

शुक्रवार, 11 मार्च 2016

नीम के ये पीले पत्ते ...

कुछ दिनों से देख रहीं हूँ
पेड़ की सुखी टहनियों से
टूटकर निर्लिप्त से, 

नीम के ये पीले पत्ते 
हवाओं की सरसराती ताल पर,
नाचते,थिरकते, आनंद मग्न,
उत्सव से भरे मेरे आंगन में
झर रहे है !
मानों कह रहे है ...
जिस धरती से हमने जन्म लिया
वापिस उसी धरती की गोद में,
विश्राम करने जा रहे है
हम मर नहीं रहे है !
मुझे लगा क्या पता
मृत्यु की कला सीखा रहे है !
नीम के ये पीले पत्ते  .. !

रविवार, 14 फ़रवरी 2016

जिंदगी ...

 जिंदगी भी न 
मुझे कभी-कभी
जिद्दी अड़ियल 

छोटे बच्चे
जैसी लगती है !
जब तक उसे
दो चार कविता
कहानियाँ सुना
बहला फुसला
पुचकार न लूँ
तब तक
टस से मस्स
नहीं होती ... !

गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

आज ह्रदय में नई उमंग है !

सभी मित्रों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !
आज ह्रदय में 
नई उमंग है !
नव वर्ष की 
नवल प्रभात है !
आओ, हम सब 
मिलकर नव संकल्प 
करे !
नव निर्माण की 
बड़ी रेखा खींचे 
छोटी रेखा को 
बिना मिटायें 
बिना चोट पहुंचाएं !
इस खूबसूरत अस्तित्व में 
इतना योगदान करें  
जाते-जाते  ...!



गुरुवार, 29 अक्तूबर 2015

चाँद ने सारे अस्तित्व पर एक तिलिस्म फैला दिया हो जैसे ...

सदियों से हमारी कल्पनाओं,सपनों,आस्थाओं,मान्यताओं का प्रतिक बना हुआ है चाँद ! किसी की कल्पना में उसमे चरखा कातती बुढ़िया दिखाई दी तो किसी को उसमे हिरन दिखाई दिया, तो किसी को उसमे अपने प्यारे मामा चंदामामा की छवि दिखाई दी ! कवियों, गीतकारों की लेखनी को चाँद में प्रेरणा स्त्रोत दिखाई दिया ! और किसी को करवा चौथ के व्रत का आराध्य जो उनके स्वामियों के दीर्घ जीवन की प्रार्थनाओं को सुनने वाला अस्थारूपी दैवत !

अरबों साल पहले हुई कुदरती उथल-पुथल से धरती से जो टुकड़े निकले चाँद उन्ही से बना हुआ है, वैज्ञानिकों ने इस प्रकार चाँद के अस्तित्व का पर्दाफाश किया ! चाँद को धरती का उपग्रह बना दिया ! पुरानी मान्यताएं, आस्थाएं बालू की भींत की तरह ढह गयी अब चाँद पर थे तो केवल पत्थर, धूल, और चट्टानें !

लेकिन आधुनिक पीढ़ी को एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण मिला चाँद को छूने की जिज्ञासा हुई ! अब वह दिन दूर नहीं जब आने वाले समय में चाँद पर बस्तियां भी बन जाएँगी ! जो भी हो एक बात सत्य है सूरज की रोशनी में जो चीजें खुरदुरी और आकर्षण विहीन दिखाई देती है वही चीजें हमें चाँद की दूधिया, रोशनी में बड़ी सम्मोहक और दिलचस्प दिखाई देने लगती है ऐसे लगता है चाँद ने सारे अस्तित्व पर एक तिलिस्म फैला दिया हो जैसे !